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Vedic Astrology • दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, सामग्री और संपूर्ण विधि

Published on 27 Oct 2026 • 1 Min Read

दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, सामग्री और संपूर्ण विधि
Astrologer J Mishra
Astrologer J Mishra
Founder • IndianAstroVedic

दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, सामग्री और संपूर्ण विधि

दीपावली प्रकाश, श्रद्धा और नई शुरुआत का पावन पर्व है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का पूजन करके परिवार में सुख, शांति, सद्बुद्धि और समृद्धि की कामना करते हैं। इस लेख में दीपावली 2026 के लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, आवश्यक सामग्री और षोडशोपचार पूजन की चरणबद्ध विधि दी गई है। इसमें शुद्धि, आचमन, आवाहन, स्नान, वस्त्र, अंग पूजा, अष्ट सिद्धि, अष्ट लक्ष्मी, धूप-दीप, नैवेद्य, दक्षिणा, पुष्पांजलि और आरती के प्रमुख चरण सम्मिलित हैं।

दीपावली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

पूजा की तैयारी पहले से कर लेने से निर्धारित समय में पूजा व्यवस्थित ढंग से की जा सकती है। नीचे दिए गए मुहूर्त आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए समय के अनुसार रखे गए हैं।

विवरणतिथि और समय
दीपावलीरविवार, 8 नवंबर 2026
लक्ष्मी पूजा मुहूर्तशाम 06:22 बजे से रात 08:20 बजे तक
मुहूर्त की अवधि1 घंटा 58 मिनट
प्रदोष कालशाम 05:58 बजे से रात 08:32 बजे तक
वृषभ काल (स्थिर लग्न)शाम 06:22 बजे से रात 08:20 बजे तक
अमावस्या तिथि प्रारंभ8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे

दिवाली पूजन की सामग्री

पूजा प्रारंभ करने से पहले सभी आवश्यक वस्तुओं को एक स्थान पर व्यवस्थित कर लें। अपनी पारिवारिक पूजा-परंपरा के अनुसार सामग्री में बदलाव कर सकते हैं।

  • कलावा, रोली और सिंदूर
  • नारियल और अक्षत यानी चावल
  • लाल वस्त्र और फूल
  • पाँच सुपारी, लौंग और पान के पत्ते
  • घी और कलश
  • कलश के लिए आम के पत्ते
  • पूजा की चौकी और समिधा
  • हवन कुंड और हवन सामग्री
  • कमलगट्टे
  • पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल
  • फल, बताशे और मिठाइयाँ
  • पूजा में बैठने के लिए आसन
  • हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम और इत्र
  • दीपक, रूई और आरती की थाली
  • कुशा और चंदन

दिवाली पूजा की तैयारी

लक्ष्मी पूजन शुरू करने से पहले गणेश जी और माता लक्ष्मी के विराजने की जगह पर रंगोली बनाएँ। पूजा की चौकी के चारों कोनों पर एक-एक दीपक रखने की व्यवस्था करें। प्रतिमाएँ स्थापित करने के स्थान पर कच्चे चावल रखें और भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की प्रतिमाएँ श्रद्धापूर्वक स्थापित करें। अपनी प्रचलित पूजा-परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी को भगवान गणेश के दाहिनी ओर रखें। उनके सामने दो बड़े दीपक रखें, एक में तेल और दूसरे में घी भरें। यदि आपकी परंपरा में कुबेर, सरस्वती और काली माता का पूजन भी होता है, तो उनकी प्रतिमाओं के लिए भी स्थान रखें।

दिवाली लक्ष्मी पूजा की संपूर्ण विधि

1. पूजा स्थल की शुद्धि

पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। गंगाजल छिड़कते हुए इस शुद्धि मंत्र का पाठ करें:

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी का ध्यान करें और प्रतिमाओं को आदर तथा श्रद्धा के साथ स्थापित करें।

2. आचमन और दीप प्रज्ज्वलन

दाहिने हाथ में जल लेकर अपनी पूजा-परंपरा के अनुसार आचमन करें और मंत्रों का उच्चारण करें:

ॐ केशवाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।
ॐ गोविन्दाय नमः।
हस्तं प्रक्षालयामि।

मंत्र पढ़ने के बाद हाथ धो लें। फिर दीप प्रज्ज्वलित करते समय कहें:

दीप ज्योति महादेवि शुभं भवतु मे सदा।

3. माता लक्ष्मी का आवाहन और स्वागत

आह्वान की मुद्रा में बैठकर माता लक्ष्मी से प्रार्थना करें:

हे महादेवी लक्ष्मी, मैं आपका आह्वान करता हूँ। आप मेरा आह्वान स्वीकार करें और पधारें।

पाँच फूल हाथ में लेकर अर्पित करें और कहें:

श्री लक्ष्म्यै देव्यै पंच पुष्पाणि समर्पयामि।

इसके बाद माता लक्ष्मी का स्वागत करें:

श्री लक्ष्मी देवि स्वागतम्।

4. पाद्य, अर्घ्य और स्नान

माता लक्ष्मी के चरणों में जल अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै पाद्यं समर्पयामि।

इसके बाद अर्घ्य अर्पित करें:

श्रीलक्ष्मी देव्यै अर्घ्यं समर्पयामि।

गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कराते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै जलं समर्पयामि।

पंचामृत स्नान के समय कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै पंचामृत स्नानं समर्पयामि।

गंध स्नान के लिए मंत्र:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै गंधं समर्पयामि।

इसके बाद शुद्ध जल अर्पित करें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि।

5. वस्त्र, मधुपर्क और आभूषण

माता लक्ष्मी को वस्त्र समर्पित करते हुए कहें:

श्री लक्ष्मीदेव्यै वस्त्रं समर्पयामि।

दूध और शहद के मिश्रण को मधुपर्क के रूप में अर्पित करें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै मधुपर्कं समर्पयामि।

इसके बाद आभूषण अर्पित करें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै आभूषणानि समर्पयामि।

6. रक्त चंदन, सिंदूर और कुमकुम

माता लक्ष्मी को लाल चंदन अर्पित करें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै रक्तचंदनं समर्पयामि।

सिंदूर अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै सिंदूरं समर्पयामि।

कुमकुम अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै कुंकुमं समर्पयामि।

7. अबीर-गुलाल, सुगंधित तेल, अक्षत, चंदन और पुष्प

षोडशोपचार पूजा में अपनी मान्य परंपरा के अनुसार उपचार क्रमशः अर्पित करें। प्रत्येक उपचार के साथ संबंधित मंत्र बोलें।

अबीर-गुलाल:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै अबीरगुलालं समर्पयामि।

सुगंधित तेल:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै सुगंधिततैलं समर्पयामि।

अक्षत:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै अक्षतं समर्पयामि।

चंदन:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै चंदनं समर्पयामि।

पुष्प:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै पुष्पाणि समर्पयामि।

8. माता लक्ष्मी की अंग पूजा

बाएँ हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर दाहिने हाथ से माता लक्ष्मी की प्रतिमा के संबंधित अंगों के सामने अर्पित करें और मंत्रों का पाठ करें:

ॐ चपलायै नमः। पादौ पूजयामि।
ॐ चंचलायै नमः। जानुनी पूजयामि।
ॐ कमलायै नमः। कटिं पूजयामि।
ॐ कात्यायन्यै नमः। नाभिं पूजयामि।
ॐ जगन्मात्रै नमः। जठरं पूजयामि।
ॐ विश्व-वल्लभायै नमः। वक्ष-स्थलं पूजयामि।
ॐ कमल-वासिन्यै नमः। हस्तौ पूजयामि।
ॐ कमल-पत्राक्ष्यै नमः। नेत्र-त्रयं पूजयामि।
ॐ श्रियै नमः। शिरः पूजयामि।

9. अष्ट सिद्धि पूजन

अंग पूजा के बाद अष्ट सिद्धियों का पूजन करें। प्रत्येक मंत्र के उच्चारण के बाद अक्षत और पुष्प अर्पित करें:

ॐ अणिम्ने नमः।
ॐ महिम्ने नमः।
ॐ गरिम्णे नमः।
ॐ लघिम्ने नमः।
ॐ प्राप्त्यै नमः।
ॐ प्रकाम्यै नमः।
ॐ ईशितायै नमः।
ॐ वशितायै नमः।

10. अष्ट लक्ष्मी पूजन

अष्ट सिद्धि पूजन के बाद माता लक्ष्मी के अष्ट स्वरूपों का स्मरण और पूजन करें। अपनी मान्य पूजा-पुस्तिका या पारिवारिक परंपरा में दिए गए मंत्रों के साथ अक्षत और पुष्प अर्पित करें। आपके मूल पाठ में अष्ट लक्ष्मी के आठ अलग-अलग मंत्र नहीं दिए गए थे, इसलिए यहाँ कोई अतिरिक्त मंत्र अनुमान से नहीं जोड़ा गया है।

11. धूप, दीप, नैवेद्य और जल

माता लक्ष्मी को धूप अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मी देव्यै धूपं समर्पयामि।

दीप अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै दीपं समर्पयामि।

नैवेद्य अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मी देव्यै नैवेद्यं समर्पयामि।

जल अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मी देव्यै जलं समर्पयामि।

चंदन अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मी देव्यै चंदनं समर्पयामि।

12. ताम्बूल और दक्षिणा

माता लक्ष्मी को पान और सुपारी अर्पित करते हुए कहें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै मुखवासार्थ पूगीफलयुक्तं तांबूलं समर्पयामि।

इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा अर्पित करें:

श्रीलक्ष्मीदेव्यै सुवर्णपुष्प दक्षिणां समर्पयामि।

13. लक्ष्मी हवन विधि और हवन मंत्र

दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा के बाद कुछ परिवारों में हवन करने की परंपरा भी है। यदि आपकी पारिवारिक पूजा-पद्धति में हवन का विधान है, तो पूजा सामग्री के साथ हवन कुंड, समिधा, घी और हवन सामग्री पहले से तैयार रखें। हवन कुंड को समतल, सुरक्षित और हवादार स्थान पर स्थापित करें।

हवन के लिए आवश्यक सामग्री

  • हवन कुंड
  • परंपरा के अनुसार समिधा
  • हवन सामग्री
  • घी और आहुति के लिए चम्मच
  • अक्षत और पुष्प, पूजा-पद्धति के अनुसार
  • जल तथा अग्नि-सुरक्षा की व्यवस्था

1. भगवान गणेश का स्मरण

हवन प्रारंभ करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और अपनी पूजा-पद्धति के अनुसार संकल्प लें।

ॐ गं गणपतये नमः॥

2. माता लक्ष्मी का मंत्र

माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए अपनी परंपरा के अनुसार मंत्र का जाप करें:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

3. हवन में आहुति

यदि आपकी मान्य हवन-पद्धति में इस मंत्र का प्रयोग स्वीकार्य है, तो घी या निर्धारित हवन सामग्री की थोड़ी मात्रा अर्पित करते समय निम्न मंत्र का उपयोग किया जा सकता है:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः स्वाहा॥

आहुति की संख्या, सामग्री और मंत्रों का क्रम अपनी मान्य पूजा-पुस्तिका या योग्य पुरोहित के निर्देशानुसार रखें। यह सामान्य मंत्र-आधारित मार्गदर्शन है, किसी विशिष्ट शास्त्रीय लक्ष्मी हवन की संपूर्ण विधि का विकल्प नहीं है।

4. हवन का समापन

हवन पूरा होने पर अपनी परंपरा के अनुसार प्रार्थना करें। अग्नि को पूरी तरह सुरक्षित रूप से बुझने दें। जलते हवन कुंड को अकेला न छोड़ें और बच्चों तथा ज्वलनशील वस्तुओं को उससे दूर रखें।

14. प्रदक्षिणा, पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना

दक्षिणा के बाद हाथों में फूल लेकर अपनी परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी की प्रदक्षिणा करें और पुष्प अर्पित करें। मन ही मन माता से प्रार्थना करें कि पूजा में हुई जाने-अनजाने की त्रुटियों और पापों के लिए क्षमा प्रदान करें। इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित करें और माता लक्ष्मी के चरणों में साष्टांग प्रणाम करें।

15. आरती और प्रसाद वितरण

पूजा के अंत में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती करें। परिवार के सदस्यों में प्रसाद बाँटें और सभी के सुख, शांति, सद्बुद्धि तथा मंगल की कामना करें। दीपक और अन्य अग्नि-स्रोतों को सुरक्षित स्थान पर रखें।

दीपावली लक्ष्मी पूजा से जुड़े सामान्य प्रश्न

दीपावली 2026 कब है?

आपके उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

आपके द्वारा दिए गए समय के अनुसार लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम 06:22 बजे से रात 08:20 बजे तक है। इसकी अवधि 1 घंटा 58 मिनट है।

लक्ष्मी पूजा में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

मुख्य सामग्री में कलावा, रोली, सिंदूर, अक्षत, नारियल, लाल वस्त्र, पुष्प, सुपारी, पान, कलश, दीपक, घी, धूप, चंदन, पंचामृत, फल, मिठाई और आरती की थाली शामिल हैं। विस्तृत सूची इस लेख में दी गई है।

क्या घर पर षोडशोपचार लक्ष्मी पूजा की जा सकती है?

श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा, जानकारी और उपलब्ध सामग्री के अनुसार घर पर पूजा कर सकते हैं। विस्तृत विधि के लिए मान्य पूजा-पुस्तिका या योग्य पुरोहित का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

निष्कर्ष

दीपावली प्रकाश, सद्भाव, कृतज्ञता और नई शुरुआत का संदेश देती है। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्रता के साथ करें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन संपन्न करें और सभी के जीवन में सुख, शांति तथा मंगल की कामना करें।

IndianAstroVedic की ओर से आपको और आपके परिवार को दीपावली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!

लेख संबंधी सूचना: इस लेख में दिए गए मुहूर्त उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए समय पर आधारित हैं। धार्मिक विधियों और मंत्रों में अलग-अलग पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।




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